त्रिएकता त्रिईश्वरवाद (tritheism) क्यों नहीं है?
ए. जे. पोलॉक इस समस्या को सटीकता के साथ प्रस्तुत करते हैं। "व्यक्ति" (person) शब्द, जब मनुष्यों पर लागू किया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से अलग अस्तित्व, अलग इच्छा, और अलग विशेषताओं का संकेत देता है। यदि उस मानवीय अर्थ को बिना विवेचन के त्रिएकता के सिद्धांत में आयात किया जाए, तो परिणाम सच्चे त्रिएक विश्वास के बजाय त्रिईश्वरवाद (tritheism) होता है: